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    13 Sep, 2026: USDMA Successfully Completes First Phase of Early Warning System Installation at Vasundhara Tal.

    Publish Date : October 14, 2026
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    वसुंधरा ताल में पूर्व चेतावनी प्रणाली की स्थापना का पहला चरण सफल, वैज्ञानिक दल लौटा

    सचिव आपदा प्रबंधन ने यूएसडीएमए में वैज्ञानिक दल का स्वागत किया

    अब ग्लेशियल झील के जलस्तर, मौसम, बर्फ और भू-गतिविधियों की होगी निगरानी

    मा0 मुख्यमंत्री एवं आपदा प्रबंधन मंत्री ने उपलब्धि पर जताई प्रसन्नता

    देहरादून, 14 अक्टूबर 2026।

    उत्तराखण्ड में ग्लेशियल झीलों से उत्पन्न संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) के खतरों की निगरानी तथा समय रहते चेतावनी जारी करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। चमोली जनपद स्थित वसुंधरा ताल में पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने का प्रथम चरण सफलतापूर्वक पूरा कर वैज्ञानिक एवं तकनीकी दल वापस लौट आया है। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने यूएसडीएमए में दल का स्वागत किया।

    उच्च हिमालयी क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच दल ने झील एवं उसके आसपास विभिन्न अत्याधुनिक सेंसर स्थापित किए हैं। राज्य में पहली बार किसी ग्लेशियल झील में इस प्रकार की सेंसर आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित की गई है, जिससे हिमालयी क्षेत्रों में आपदा जोखिमों की वैज्ञानिक निगरानी को मजबूती मिलेगी।

    आपदा जोखिम न्यूनीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि

    मा0 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने वसुंधरा ताल में पूर्व चेतावनी प्रणाली की स्थापना के प्रथम चरण की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य में ग्लेशियल झीलों से उत्पन्न संभावित खतरों की समय रहते पहचान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और संस्थागत समन्वय के माध्यम से राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि यह प्रणाली उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जोखिमों की निगरानी, समयबद्ध चेतावनी तथा संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    मा0 आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री श्री मदन कौशिक ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस अभियान के माध्यम से पहली बार राज्य की एक ग्लेशियल झील में आधुनिक सेंसर आधारित निगरानी व्यवस्था स्थापित की गई है। इससे जलस्तर, मौसम, हिम की स्थिति तथा अन्य महत्वपूर्ण प्राकृतिक परिवर्तनों से संबंधित आंकड़े प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

    मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने कहा कि यह पहल राज्य की आपदा पूर्व तैयारियों को तकनीकी एवं वैज्ञानिक दृष्टि से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सेंसर से प्राप्त आंकड़ों की नियमित निगरानी एवं वैज्ञानिक विश्लेषण से झील और उसके आसपास होने वाले महत्वपूर्ण परिवर्तनों को समझने में मदद मिलेगी।

    वैज्ञानिक संस्थानों एवं सुरक्षा बलों का महत्वपूर्ण योगदान

    सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) द्वारा राष्ट्रीय ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत वसुंधरा ताल में पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने का अभियान संचालित किया गया।

    इस अभियान में केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की तथा वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, देहरादून के वैज्ञानिकों एवं तकनीकी विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यूएसडीएमए द्वारा अभियान के लिए आवश्यक समन्वय, लॉजिस्टिक सहायता एवं संचार उपकरण उपलब्ध कराए गए। अभियान में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और आईटीबीपी का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

    Scientific team working at Vasundhara Tal

    अत्याधुनिक सेंसर से होगी झील एवं आसपास के क्षेत्र की निगरानी

    वसुंधरा ताल में स्थापित प्रणाली के अंतर्गत ऑल-इन-वन मौसम सेंसर लगाया गया है, जो हवा की गति एवं दिशा, वर्षा, सौर विकिरण, वायु तापमान और वायुदाब से संबंधित आंकड़े मापेगा। झील के जलस्तर की निगरानी के लिए फ्लोटिंग एवं सबमर्ज्ड वाटर लेवल सेंसर लगाए गए हैं।

    संभावित बाढ़ के प्रभाव से उत्पन्न कंपन, झुकाव एवं भू-गतिविधियों की निगरानी के लिए एक्सेलेरोमीटर और टिल्ट सेंसर स्थापित किए गए हैं। हिमस्खलन से संबंधित गतिविधियों की निगरानी के लिए अतिरिक्त सेंसर भी लगाए गए हैं। इसके अलावा, बर्फ की गहराई मापने के लिए स्नो डेप्थ सेंसर तथा बर्फ की सतह के नीचे विभिन्न गहराइयों और झील की सतह के तापमान की निगरानी के लिए तापमान सेंसर लगाए गए हैं।

    इन उपकरणों से प्राप्त आंकड़े झील के जलस्तर, स्थानीय मौसम, बर्फ की स्थिति और आसपास होने वाली संभावित भू-गतिविधियों में बदलाव को समझने में सहायक होंगे।

    Sensors installed for monitoring Vasundhara Tal

    38.50 मीटर गहरी है वसुंधरा ताल

    सीबीआरआई, रुड़की के वैज्ञानिक एवं अभियान दल के प्रमुख डॉ. डीपी कानूनगो ने बताया कि वसुंधरा ताल की गहराई लगभग 38.50 मीटर, चौड़ाई 600 मीटर तथा लंबाई 900 मीटर है। अभियान के दौरान झील में स्थापित सेंसरों और संचार प्रणाली के माध्यम से आंकड़ों के आदान-प्रदान का सत्यापन किया गया। उपलब्ध पूर्व आंकड़ों एवं वर्तमान स्थिति के अनुसार झील के आकार में कोई विशेष बदलाव नहीं देखा गया है।

    पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के लिए ऐसे स्थान का चयन किया गया, जहां भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी गतिविधियों का जोखिम बेहद कम है। उपकरणों की स्थापना में उच्च हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, मौसम और उपकरणों की सुरक्षा को ध्यान में रखा गया।

    हर दो घंटे में डैशबोर्ड पर पहुंचेगा डेटा

    सीबीआरआई, रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार ने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में सेंसर प्रत्येक दो घंटे में आंकड़े सीबीआरआई, रुड़की तथा यूएसडीएमए में स्थापित डैशबोर्ड पर भेजेंगे। दोनों स्थानों पर प्राप्त आंकड़ों की नियमित निगरानी की जाएगी।

    किसी भी आपातकालीन स्थिति में निर्धारित दो घंटे के अंतराल की प्रतीक्षा किए बिना सेंसर तत्काल आंकड़े भेज सकेंगे। इससे संभावित असामान्य परिस्थितियों की समय रहते पहचान करने में सहायता मिलेगी।

    Early warning system monitoring and data transmission equipment

    इरिडियम उपग्रह संचार तकनीक से जुड़े उपकरण

    वसुंधरा ताल उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण वहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए प्रणाली में इरिडियम उपग्रह संचार तकनीक का उपयोग किया गया है। इसके माध्यम से सेंसरों से प्राप्त आंकड़े संबंधित डैशबोर्ड तक पहुंचाए जाएंगे। अभियान दल ने वापसी से पहले डेटा संचार प्रणाली का सत्यापन किया और सभी आंकड़े अपेक्षानुसार प्राप्त हुए।

    सौर ऊर्जा एवं बैटरी से मिलेगा विद्युत बैकअप

    दुर्गम क्षेत्र में उपकरणों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए सौर पैनल और बैटरी की व्यवस्था की गई है। प्रणाली में 280 एम्पीयर क्षमता की बैटरी लगाई गई है, जो पर्याप्त धूप नहीं मिलने की स्थिति में लगभग 10 दिनों तक बैकअप देने में सक्षम है। इससे प्रतिकूल मौसम के दौरान भी प्रणाली के संचालन को बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

    Solar power and battery backup for the early warning system

    स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया फाउंडेशन

    उपकरणों की स्थापना के लिए स्टील के मॉड्यूलर डिजाइन पर आधारित फाउंडेशन तैयार किया गया है। इसमें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री का उपयोग किया गया है और सीमेंट का प्रयोग नहीं किया गया। फाउंडेशन को स्थानीय पत्थरों के माध्यम से मजबूती प्रदान की गई है।

    क्षेत्र में हवा की गति लगभग 15 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा आंकी गई है, जबकि फाउंडेशन का डिजाइन 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक की हवा की गति को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

    Modular foundation for monitoring equipment at Vasundhara Tal

    इस अवसर पर सीबीआरआई, रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार, सीबीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. डीपी कानूनगो, डॉ. एसके पाणीग्रही, डॉ. कौशिक पंडित, श्री चंद्रभान पटेल, श्री कांतिलाल सोलंकी, डॉ. राजेश कुमार दास, श्री अजीत सिंह गहरवार, श्री आदित्य भगत सहित अन्य अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।